कृष्णा मन मेरा दर्पण
कृष्णा मन मेरा दर्पण
मेरा मन मेरा दपऀण
तन मेरा अर्पण
क्या तन क्या मन;
क्या लेना क्या देना है!
जीवन एक झमेला है!
आत्मा अमर है!
शरीर एक नश्वर है!
एक दिन राख बन जाना
मिट्टी का शरीर
मिट्टी में मिल जाना हैं!
मेरा सत्य मेरा विश्वास!
मेरा प्यार मेरा परमात्मा!
मेरा घर मेरी जन्नत;
मा-बाप है..मेरी मन्नत
बेटा -बेटी में नहीं हैं.. कोई भेद!
ना ही पति से कोई मतभेद!
मेरा जीवन हैं..मेरी प्यारी नाव
न हमें डगमगाना हैं..
न ही हमें डूब जाना हैं;
सारे संकंट से परे तेैरकर ही
वापिस आना है!
ये जीवन है..अपना अनमोल;
सुख-दुख में सबके साथ;
और अपनों के साथ .
हर एक रिश्ता बड़े प्यार से निभाना है!
जीवन की हर कहानी को
एक नयी जीवन कहानी बनाना है!
सबसे बड़ा है..भगवान!
फिर हैं..दो दिल महान!
माँ-बाप देवस्थान!
!!माता-मातृत्व!!
!!पिता -पितृत्व!!
बाकी हैं..सब बच्चे श्याम!
यही हैं..अपने चारों धाम!
क्या धन हैं..पाना!
क्या तन है..जाना!
जीवन हैं..सबका अनमोल
सुख-दुख तो हैं..सबके संग!
दो प्यारे शब्द मीठी वाणी के बोल!
ना कर अपने आप पर घमंड इतना!
किसने क्या पाया;
किसने क्या खोया!
जीवन वही जिया हैं;
जिसने मन के सुख को पाया!
विचार कर-आचार कर!
सारे सदगुण सदाचार कर!
नहीं हैं..कहीं जाना;
अपनों को छोड़ कर!
बस प्रभु शरण में रम जाना!
यही हैं..अपना जीवन सारा!
कृष्णा हैं..हमारा सबसे प्यारा!
!कृष्णा-कृष्णा-कृष्णा .!
अल्लाह करम कर!
जो नफरत करे!
उन पर रहम कर!
बक्श दे उन नादान दिल को!
जो कुछ गलत कर गये!
जिंदगी में कुछ अहम कर!
मरना तो है..एक दिन सभी को!
जाते-जाते ही सही तुम;
अपना सब कुछ दान कर!
मिल ही जायेंगे तुम्हें
पुण्य और फलदान!
अपने कमोऀ का -अच्छे फल का!
क्या लेना क्या देना है;
ये जिंदगी अपनी एक झमेला है!
जितना इसके प्यार में उलझोगे;
उतना ये तुम्हें सतायेगी!
जितना तुम मुस्कराओगे!
उतना ये तुम पर मुस्करायेगी!
जितना तुम जलोगे;
उतना ये तुम्हें जलायेगी !
जितना तुम तड़पोगे
उतना ही तुम्हें तड़पायेगी!
जितना तुम पाओगे इससे;
ये उतना ही तुम्हें
और लालच दिखायेगी!
पर तुम लालच में न आना;
अपने अच्छे करम करते जाना!
हो सके तो सबके जीवन में;
मुस्कराहट और प्यार के फूल बिखेरना!
तुम्हारा जीवन खुद गाडऀन बन जायेगा!
उस खुशबू से तुम्हारा जीवन
खुद ब खुद महक जायेगा!
याद रखना तुम सब मेरी ये बात;
ये कोई मेरी कविता नही;
अपने सबके जीवन की कहानी है!
लिखी तो हैं..मैने अपने दिल से!
बस अपने -अपने किरदार को निभानी है!
जो किरदार निभा गया समझो!
वो अपना जीवन मुक्त कर गया!
उसके करम का फल वो
इसी जनम मे चुकता कर गया!
आप क्या सोच रहे हो;
शुरू करो आज से करम करना ;
मैने तो कर दिया आज से!
आप भी कर दो मेरी कविता पढ़कर!
वाहवाही नही चाहिये मुझे ..जीवन मे;
आप सभी का प्यार बना रहे मन मे;
इतनी सी दिल में जगह चाहिये!
