आनन्द बल्लभ
Inspirational
करनी फल मिलता सखे, जल्दी या कुछ देर।
निंदा, ईर्ष्या त्याग कर, राम सुमिरनी फेर।
राम सुमिरनी फेर, सिन्धु से तर जाएगा।
कर ले सच्चे काम, फूल सा खिल जाएगा।
कहे मूढ़ आनन्द, देह मिट्टी की बरनी।
गल जाये इक रोज, सदा शुभ कर लो करनी।
सवैया
करनी का फल
वृक्ष
पेड़ सौ हर दि...
मुस्कराहट मनुष्य को जीने की कला सिखाती, मुस्कराहट मनुष्य के जीने की उम्र बढ़ाती, मुस्कराहट मनुष्य को जीने की कला सिखाती, मुस्कराहट मनुष्य के जीने की उम्र बढ़ा...
बीज रोपते माटी में कोपलें फूटती माटी में! बीज रोपते माटी में कोपलें फूटती माटी में!
महँगाई से हम लड़ते थे, पेट काटकर कर भरते थे क्या हम आत्मनिर्भर नहीं थे? ये पूछता है महँगाई से हम लड़ते थे, पेट काटकर कर भरते थे क्या हम आत्मनिर्भर नहीं थे? ये प...
कण-का में उस प्रभु को देखो, बस हो गया भजन जात -पात का बंधन तोड़ो, बस हो गया भजन कण-का में उस प्रभु को देखो, बस हो गया भजन जात -पात का बंधन तोड़ो, बस हो गया भज...
ईश्वर की इबादत की कदर कर ..। बक्षी है उसने जो जिंदगी उसी की कदर कर ! ईश्वर की इबादत की कदर कर ..। बक्षी है उसने जो जिंदगी उसी की कदर कर !
ज़िन्दगी में जो जो ठाना था, सारी नहीं तो कुछ बातों पर तो अमल कर लेते ज़िन्दगी में जो जो ठाना था, सारी नहीं तो कुछ बातों पर तो अमल कर लेते
वीरों का सम्मान हो नारी का उत्थान हो हर जन-मानस का विकास हो। वीरों का सम्मान हो नारी का उत्थान हो हर जन-मानस का विकास हो।
जन्म दिया जिसने कोख से, वही आज परेशान है! जन्म दिया जिसने कोख से, वही आज परेशान है!
जो आज है, वह कल हो जाएगा, एक एक दिन यूँ ही बढ़ता जाएगा! जो आज है, वह कल हो जाएगा, एक एक दिन यूँ ही बढ़ता जाएगा!
नया साल नई खुशियां लाए नई उमंग नए संकल्पों से! नया साल नई खुशियां लाए नई उमंग नए संकल्पों से!
धन -दौलत वैभव के खातिर, समय किया बड़ा बेकार, फिर भी मन में अशांति छाई, किससे करूँ धन -दौलत वैभव के खातिर, समय किया बड़ा बेकार, फिर भी मन में अशांति छाई, किससे...
दूजे की मर्ज़ी का तुम अपने जीवन में न रंग भरो! दूजे की मर्ज़ी का तुम अपने जीवन में न रंग भरो!
अभिमान को इस कदर पालने लगे हैं, कि आदर सम्मान भी भूलने लगे हैं। अभिमान को इस कदर पालने लगे हैं, कि आदर सम्मान भी भूलने लगे हैं।
जितना चाहे कर लो अर्जित न उम्र का इसमें कोई आधार जितना चाहे कर लो अर्जित न उम्र का इसमें कोई आधार
अहम में इतना चूर हुआ कि, जो कुछ समझा, है सब मेरा। सत्संग में जब आना हुआ तो, झकझोर दिया अहम में इतना चूर हुआ कि, जो कुछ समझा, है सब मेरा। सत्संग में जब आना हुआ तो, झ...
यम- नियम कुछ कर ना पाता, खुद के प्रयास सब विफल हो जाते यम- नियम कुछ कर ना पाता, खुद के प्रयास सब विफल हो जाते
डूबता हुआ सूरज हूँ ढल जाऊँगा! प्रकश से अन्धियारे की और ले जाऊँगा। डूबता हुआ सूरज हूँ ढल जाऊँगा! प्रकश से अन्धियारे की और ले जाऊँगा।
जिंदगी के इस अनोखे सफर में, बस यूं ही चलते जाना है। जिंदगी के इस अनोखे सफर में, बस यूं ही चलते जाना है।
है कहाँ अब देश जो सभ्यता अपना बचा पाया, ये तो भारत है जो इतने हमलों को सह पाया। है कहाँ अब देश जो सभ्यता अपना बचा पाया, ये तो भारत है जो इतने हमलों को सह पा...
ज़माना हमें अब साहित्य से जुड़ा मानता है, पहले से ज़्यादा दूर से ही पहचानता है। ज़माना हमें अब साहित्य से जुड़ा मानता है, पहले से ज़्यादा दूर से ही पहचानता है।