कर लो तुम कितने भी जतन
कर लो तुम कितने भी जतन
कर लो तुम कितने भी जतन,
होना है यहां सबका ही पतन ,
ना तुम्हारी छाया साथ देगी ,
ना तुम्हारी माया साथ देगी ,
ना बुढ़ापे में ये काया साथ देंगी,
साथ देंगे ,सिर्फ तेरे अच्छे करम,
कर्म का फल मिलता है जरूर ,
खुद पे करना ना तु कभी गुरुर,
जीतना गहरा कुआं होगा ,
उतना ही जल मीठा होगा ,
कर ले कुछ अच्छे करम,
मिल जायेंगे प्रभु के चरण ।।
