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Vijay Kumar parashar "साखी"

Inspirational

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Vijay Kumar parashar "साखी"

Inspirational

कोई तो चिंगारी

कोई तो चिंगारी

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कोई तो चिंगारी जीवन मे होनी चाहिए

हृदय में कोई तो ज्योति होनी चाहिए


बिन चिंगारी,क्या रोशन होगी जिंदगी,

भीतर कोई तो रोशनी होनी चाहिए


जैसे तैरने के लिये पतवार जरूरी है

वैसे जीवन के लिये चिंगारी जरूरी है


तिमिर होती जिंदगी हंसाने के लिये,

कोई तो जुगनू ज्योति होनी चाहिए


जैसे सूर्य के बिना चिंगारी के व्यर्थ है,

वैसे ही व्यक्ति भी बिना चिंगारी मृत है,


भीतर कोई तो जगमगाहट होनी चाहिए

कोई तो चिंगारी जीवन मे होनी चाहिए


जग जलाने के लिए नही,बनाने के लिये,

भीतर कोई तो जलती जोत होनी चाहिए


मुरझाये हुए पल्लव हंसाने के लिये,

कोई तो खिलखिलाहट होनी चाहिए


जीवन का अंधेरा,साखी मिट ही जायेगा,

कोई तो भोर किरणे भीतर होनी चाहिए


कोई तो चिंगारी जीवन मे होनी चाहिए

निराशा में कोई तो आशा होनी चाहिए


पत्थर सा जीवन कोमल फूल बन जाए,

जीवन मे कोई तो ऐसी आग होनी चाहिए


मुर्दे के अंदर भी जो नव प्राण फूंक दे,

ऐसी कोई भीतर ज्वाला होनी चाहिए


कोई तो चिंगारी जीवन मे होनी चाहिए

टूटे जीवन मे कोई तो बात होनी चाहिए!



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