किसने छोड़ा तीर लिखूँ
किसने छोड़ा तीर लिखूँ
गलियारों में गूॅज रहे स्वर बारूदी गंभीर लिखूं।
चिरे न फिर से माँ का आँचल बहे न नैना नीर लिखूं।।
हुए देशके थे जब टुकड़े वह चिंगारी फिर दहकी
बने न फिर दावानल फैले आॅख वही लगती लहकी
अस्तो माॅ सदगमय विवादित किसने छोड़ा तीर लिखूं।१
मॅहगी शिक्षा रोज़गार को भटक रहा नित यौवन है
फसल सड़क पर पड़ी कराहे ये कैसा पागलपन है
प्रश्नचिह्न तन रहे अनगिने पर तुम सोये वीर लिखूं।२
नेताओं के कोष भरे हैं खाते नित्य मलाई रे
भूखी नंगी जनता डोले शर्म नहीं पर आई रे
राजनीति व्यवसाय बनी है होकर बहुत अधीर लिखूं।३
रक्षक ही भक्षक बन बैठे लोकतंत्र फिर आह भरे
कहने को है काल कोठरी पर महलों से डाह करे
यूॅ लगता है लालकिले की घायल है प्राचीर लिखूं।४
वोटों के व्यापारी ठगते काॅकरिया से किरक रहे
तीनों अंग प्रदूषित फिर भी बेशर्मी से थिरक रहे।
संसद की तकदीर लिखूं या प्रजातंत्र की पीर लिखूं।
