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Sneha Bhushan

Romance

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Sneha Bhushan

Romance

ख्वाब

ख्वाब

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कभी हम गुनगुनाते 

कभी हम लफ्जो को उतारते हैं !


एक कागज का टुकड़ा 

कभी मेरी जिंदगी,

कभी मेरी जिंदगी से फरमाइशें सुनाता !


खुशियाँ चंद लम्हो की, 

गम भी चन्द पलों का !


जब कभी भी अपने आप को तलाशूँ

तो खुद को इन्ही जज्बातों के बीच पाऊँ


कभी कोई मेरी निशानी मांगे, 

तो मेरा पता "ख्वाब "बता देना !


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