खुशियाँ
खुशियाँ
किसी बोझिल दिल की आवाज़ को
अगर अपनी खुशियों से साराबोर कर सको,
तो समझ लेना कि तुमने किसी
बंद ताले को
अपनी ज़िंदादिली से खोल दिया...!!!
खुशियाँ बांटने से ज़रूर बढ़ती हैं --
इतना यक़ीन मानो...
ज़रा नियत में खुद्दारी पैदा करना...
और फिर देखना कि कितना सुकून मिलता है
किसी टूटे हुए दिल को
अपनी ज़िंदादिली का एहसास दिलाने में...!!!
