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हरि शंकर गोयल "श्री हरि"

Classics Fantasy Inspirational

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हरि शंकर गोयल "श्री हरि"

Classics Fantasy Inspirational

खुशी वाला समाचार

खुशी वाला समाचार

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तुम्हारे आने की आहट से ही घर का हर कोना महकने लगा है 

खुशियों को जैसे पर लग गए हैं

मन कल्पनाओं में विचरने लगा है । 


चारों ओर उजाला सा फ़ैल गया है 

अंधेरा भी एक कोने में मुस्कुराने लगा है 

सबकी आंखें बात करती सी लगती हैं 

अधरों पे हरदम एक मुस्कान खेलती है 


दादाजी अपनी पीठ तैयार कर रहे हैं 

दादी नर्म मुलायम वस्त्र सिल रही है 

बुआ किस कदर उत्साहित हैं, 

बताना है मुश्किल 

चाचू भी कह रहा है कि अब 

मुझसे छोटा आ रहा है 

इसलिए अरे बचपन , 

अब तू चुपचाप यहां से निकल । 


न जाने कितने दिनों बाद 

यह शुभ अवसर आया है 

जब दो नन्हे कदमों को  

छैंया छैंया चलते देखने के लिए 

सबका मन बहुत हरषाया है । 


खिलोनों का अंबार सा लग गया है 

बच्चों वाले गाने , राइम्स का एक 

अद्भुत "कलैक्शन" बन गया है 

सबका बचपन फिर लौट आया है 


मम्मी पापा तो एक एक दिन 

उसके साथ ही बड़े हो रहे हैं 

ऐसा लगता है कि वे दोनों 

अनंत आसमान में उड़ रहे हैं 


ईश्वर की कृपा से ये खुशी मिली है

मासूमियत की टोकरी आ रही है 

किलकारियां सुनने के लिए 

बेचैनी बढ़ती ही जा रही है। 


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