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jagjit singh

Abstract

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jagjit singh

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कहा हो

कहा हो

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तेरे बारे आजकल इंसान कम, 

बंदूक ज्यादा बोल रहा है, 


तुझ को देख, प्यार नहीं,

डरना मजबूरी बन गया है, 


वो जो आंसू तूने बहाया कभी, 

मुझे, आजकल मगरमच्छ याद आ रहा है, 


आजकल, तेरे दरबार में कम, 

कहीं और व्यस्त लाग रहे हो। 


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