STORYMIRROR

Dr Saket Sahay

Abstract

4  

Dr Saket Sahay

Abstract

कड़वाहट

कड़वाहट

1 min
364

समाज में 

देश में 

जन में 

विचारों में 

विमर्श में 

सोच में 

शून्य का आकाश

निर्मित करती है।

 

मानव को जड़ बनाती है

यह जड़ता 

समाज के लिए

देश के लिए 

मानवता के लिए 

बड़ी घातक होती है।

 

क्योंकि जड़ता

मूढ़ता की अनुगामी है

विचारों का चैतन्य होना जरूरी है 

देश, समाज की सशक्तता हेतु 

विचारों का सामंजस्य भी

फिर सामंजस्य गायब क्यों ?


यह द्वन्द, कड़वाहट

हमें कहाँ ले जाएगी ?

विचारों की जड़ता से

भला किसी का नहीं 

जो जड़ है वह मृत है

संसार की सार्थकता आनंद में है 

सामंजस्य में है।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract