कौन है पराया और कौन अपना
कौन है पराया और कौन अपना
कौन है पराया औऱ कौन अपना जो सब भुला देगा,
मनायें हम जिंदगानी अपनी उसे जो सब लुटा देगा।
हमारे सामने की भीड़ से होकर तुम जबभी गुजरोगे,
कि आगे आने वाला हर कोई तुमको रास्ता ना देगा।
जलाके दिये कि लौ ज़रा तुम हवाओं पे नज़र रखना,
ये झोंका हवाओं का पलभर में चराग़ को बुझा देगा।
कोई पूछेगा जिस दिन तुम्हें की ये ज़िन्दगी क्या है,
एक मुठ्ठी ज़मीं. से धूल हाथों में उठाना बता देगा।
गिला, शिकवा ,और हसद वो तोहफा मेरी किस्मत,
अहबाब अब ज़ियादा औऱ तुम्हें "हार्दिक" क्या देगा।
