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Sadhna Mishra

Inspirational

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Sadhna Mishra

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कौन है अपना कौन पराया

कौन है अपना कौन पराया

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कौन है अपना कौन पराया दुख की बदली स्पष्ट दिखाए।

ईश्वर के काल चक्र की गणना कोई कर ना पाए।।


संवादों के बांध अनोखे पार सभी कर ना पाए।

जीवन की जाती सांसों को चाह कर भी हम गिन ना पाए।।


खुशियों के वितान में भारी भीड़ सभी की देखी।

गम की धुंध में धुंधली सूरत अपनों की देखी।।


सब रंगों में श्रेष्ठ श्वेत रंग कुंठित तब हो जाता है।

लाल चुनरिया छोड़ जब कोई श्वेत रंग को पाता है।।


अपनेपन का आभास लिए हम दूर तलक बढ़ जाते हैं।

अपने जो पराए हो तो पग में ताले जड़ जाते हैं।।



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