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Dr Sanjeev Dixit

Abstract

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Dr Sanjeev Dixit

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ज़रूरत

ज़रूरत

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ज़िंदगी तेरे सुक़ून में ख़ुशी का बसर है

तेरी ज़रूरत से ज़्यादा कुछ भी ज़हर है


ख़ुद पर यक़ीन ही है जीने की मुहिम

भरोसे की कमी ही सबसे बड़ा डर है


ख़ूबी से *मुतास्सिर होना है *तख़लिक

बाक़ी सब बस जलन है और फ़िक्र है

*मुतास्सिर - Impressed, प्रभावित

*तख़लिक - Inspiration, प्रेरणा


दुनिया न जीत पाओ तो ना होना बेचैन

ख़ुद को फ़तह करने में बे-इंतहा सब्र है


शर्तों की नज़रों से देखा तो हुई नफ़रत

अब *कती से गले लगाया तो असर है

*कती - unconditional, बिना शर्त


ज़िंदगी तेरे सुक़ून में ख़ुशी का बसर है

तेरी ज़रूरत से ज़्यादा कुछ भी ज़हर है।


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