STORYMIRROR

विजय कुमार प्रजापत

Inspirational

3  

विजय कुमार प्रजापत

Inspirational

जल

जल

1 min
179

जल निर्मल है जल शीतल है

जल से चलता संसार है।

जल जीवन है जल पावन है

जल चेतन का आधार है।


जल नभ में है

जल कण में है।

कहीं बिन पैसे

कहीं ऋण में है।


कहीं नल में है

कहीं नालो में।

कहीं धरती में

कहीं प्यालो में।


कुछ के लिए वरदान है ये

कुछ के लिए व्यापर है।

जल निर्मल है जल शीतल है

जल से चलता संसार है।


जल जीवन है जल पावन है

जल चेतन का आधार है।

कहीं तरसाता है 

सबको ये।


कहीं मेघों की 

हलचल में है।

जल जग में है

रग रग में है।


जल गंगा की

कल-कल में है।

बच्चों के लिए खिलौना है

नित ही चलती इक धार है। 


जल निर्मल है जल शीतल है

जल से चलता संसार है।

जल जीवन है जल पावन है

जल चेतन का आधार है।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

More hindi poem from विजय कुमार प्रजापत

Similar hindi poem from Inspirational