Tanya Goyal
Abstract
कभी कभी उदासी की
आग है जिंदगी
कभी कभी खुशियों का
बाग हैं जिंदगी।
हँसता और रुलाता
राग है जिंदगी
कड़वे और मीठे अनुभवों
का स्वाद है जिंदगी।
पर अंत में तो
अपने किये हुए कर्मो का
हिसाब है जिंदगी !
आत्मविश्वास
हँसना रोना
वक़्त
अच्छाई हर कोन...
यादगार बदलाव
भाई
बढ़ती उम्र
उपाय का पुलिं...
जिंदगी
बूंदें
पतझड़ में झड़ गए पत्ते सारे सूखी शाख पर लगी है आग। पतझड़ में झड़ गए पत्ते सारे सूखी शाख पर लगी है आग।
है पूजा मैथिली ने और सुमन से सजाया, है हिन्दी के भवन में, दुर्गा तेरा उजाला। है पूजा मैथिली ने और सुमन से सजाया, है हिन्दी के भवन में, दुर्गा तेरा उजाला।
वक्त का क्या मौका ये आए न आए, कि ढह चला है किला दरार के साथ। वक्त का क्या मौका ये आए न आए, कि ढह चला है किला दरार के साथ।
वो सिरहाने पड़ा सपना यह बड़ा शहर भी क्या चीज़ है ना ! वो सिरहाने पड़ा सपना यह बड़ा शहर भी क्या चीज़ है ना !
सृष्टि के संचालन में अहम् भूमिका है, एक पिता का होना ----------- सृष्टि के संचालन में अहम् भूमिका है, एक पिता का होना -----------
भक्तिमार्गी को राह मिलन की, 'काफ़िर' दिखला गया। भक्तिमार्गी को राह मिलन की, 'काफ़िर' दिखला गया।
आज्ञा पाकर शिव शंकर से सती पिता के घर तो आ गई। किंतु पिता के मुख से पति का अपमान सती स आज्ञा पाकर शिव शंकर से सती पिता के घर तो आ गई। किंतु पिता के मुख से पति का अप...
ज़िंदगी कब सरल थी हुई, कब मैं इतनी विरल थी हुई ज़िंदगी कब सरल थी हुई, कब मैं इतनी विरल थी हुई
तेरे हर सवाल का जवाब देना बाकी है अभी, जिंदगी तेरा कर्ज़ चुकाना बाकी है अभी। तेरे हर सवाल का जवाब देना बाकी है अभी, जिंदगी तेरा कर्ज़ चुकाना बाकी है अभी।
बस खाना - डरना और जनना, इतने में ही, इंसान क्यों पड़ा है? बस खाना - डरना और जनना, इतने में ही, इंसान क्यों पड़ा है?
पल-पल रखते उनका ध्यान, एक दूजे पर छिड़के जान।। पल-पल रखते उनका ध्यान, एक दूजे पर छिड़के जान।।
और मेरे अक्षरों में, तुम्हारे सुख को पलीता लगाते हुए तीखे सवाल हैं! और मेरे अक्षरों में, तुम्हारे सुख को पलीता लगाते हुए तीखे सवाल हैं!
हल्दीघाटी पावन धाम पे हर कोई शीश नवाता है हल्दीघाटी पावन धाम पे हर कोई शीश नवाता है
अपने बच्चे को गर्भनाल से अलग नहीं कर पाएगी। अपने बच्चे को गर्भनाल से अलग नहीं कर पाएगी।
ओ जाना फिर मैं क्यों बदलूँ अन्त मे बस मैं यही कहूँगा ना बदला हूँ ना बदलूँगा। ओ जाना फिर मैं क्यों बदलूँ अन्त मे बस मैं यही कहूँगा ना बदला हूँ ना बदलूँ...
ममता कातर गाय दिखा गयी एक राह रथ के आगे खड़ी हो बता गयी थी चाह ममता कातर गाय दिखा गयी एक राह रथ के आगे खड़ी हो बता गयी थी चाह
प्रभु मूरत देख कर देवता अयोध्या में रहे, ये करें विचार। प्रभु मूरत देख कर देवता अयोध्या में रहे, ये करें विचार।
मुझे मायका बनाना है अपनी ससुराल को मुझे मायका बनाना है अपनी ससुराल को
लोग कहते माँ मुझे पर मैं बड़ी असहाय हूँ॥ लोग कहते माँ मुझे पर मैं बड़ी असहाय हूँ॥
ममता की प्रतिमूर्ति ऐसी, देवी छोटी पड़ जाती है, धरती पे माँ कहलाती है। ममता की प्रतिमूर्ति ऐसी, देवी छोटी पड़ जाती है, धरती पे माँ कहलाती है।