Tanya Goyal
Abstract
कुछ तो चाहत होगी,
इन बारिशों की
बूंदों की भी।
वरना
कौन गिरता है
इस जमीन पर,
आसमान तक
पहुंचने के बाद ?
आत्मविश्वास
हँसना रोना
वक़्त
अच्छाई हर कोन...
यादगार बदलाव
भाई
बढ़ती उम्र
उपाय का पुलिं...
जिंदगी
बूंदें
निष्प्राण पुष्प और कली सिसकती, पीड़ा आँसू आँगन में... निष्प्राण पुष्प और कली सिसकती, पीड़ा आँसू आँगन में...
नहीं टूटते आसानी से क्योंकि मजबूत होते हैं मगर विश्वास नहीं हो तो हैं जाते टूट ये धागे। नहीं टूटते आसानी से क्योंकि मजबूत होते हैं मगर विश्वास नहीं हो तो हैं जाते टू...
आखिर बेटी हूं ना उनकी। आखिर बेटी हूं ना उनकी।
कभी चाँद कभी तारों से, तो कभी बहती हुई नदियों से; अपना ही परिचय पूछने लग गये... कभी चाँद कभी तारों से, तो कभी बहती हुई नदियों से; अपना ही परिचय पूछने लग गये.....
फिर भी जाने क्यों हर रोज़ सोने से पहले एक तकिया और अपने तकिये के पास रख देती हूँ, जा... फिर भी जाने क्यों हर रोज़ सोने से पहले एक तकिया और अपने तकिये के पास ...
हरा -भरा जो आज यहां पर, कल ठूंठ छूंछ हो जाएगा। हरा -भरा जो आज यहां पर, कल ठूंठ छूंछ हो जाएगा।
मनवा लगाए बैठे सपनों के बाग़ रे, अब न सुनी है मेरी कोई भी बात ये... मनवा लगाए बैठे सपनों के बाग़ रे, अब न सुनी है मेरी कोई भी बात ये...
सच मानों तो ... अब यह शब्द मुझे विवश करें इतनी इनकी ....औकात नहीं । मैं नारी हूँ ... नारी मेरे ब... सच मानों तो ... अब यह शब्द मुझे विवश करें इतनी इनकी ....औकात नहीं । मैं नारी ...
खोने लगी अँधेरों में हो गई उदास वह अब उस पर इलज़ाम लगाता की बदल गई है वो पहले सी नहीं... खोने लगी अँधेरों में हो गई उदास वह अब उस पर इलज़ाम लगाता की बदल गई ह...
मैं जब भी लड़खड़ाया या डगमगाया, माँ तूने रास्ता दिखला भट्काव से बचाया ! मैं जब भी लड़खड़ाया या डगमगाया, माँ तूने रास्ता दिखला भट्काव से बचाया !
पथरा जातीं हैं धरती की आँखें, उसके होठों पर पपड़ी जम जाती है... पथरा जातीं हैं धरती की आँखें, उसके होठों पर पपड़ी जम जाती है...
जैसे साइबेरिया से आये तमाम पक्षी खिलखिलाते हैं यहाँ सर्दियों में। जैसे साइबेरिया से आये तमाम पक्षी खिलखिलाते हैं यहाँ सर्दियों में।
कोई भावना भी है कहीं, या होती हैं पर कहती नहीं... कोई भावना भी है कहीं, या होती हैं पर कहती नहीं...
जो पौरुष मृत्यु को भी जीत लाता था, आज वही वीभत्स घटनाओं का क्यों आधार है ? जो पौरुष मृत्यु को भी जीत लाता था, आज वही वीभत्स घटनाओं का क्यों आधार है ?
बस फिर... विस्मृत हो जाता है अंतर्मन में व्याप्त गीता की सीख, मद में चूर, अनसुनी कर बैठता ... बस फिर... विस्मृत हो जाता है अंतर्मन में व्याप्त गीता की सीख, मद में चूर,...
पर्याय ही तो है हम एक दूसरे का। पर्याय ही तो है हम एक दूसरे का।
अभिमंत्रित मंत्र हूँ में प्राण प्रतिष्ठित मूरत हूँ अभिमंत्रित मंत्र हूँ में प्राण प्रतिष्ठित मूरत हूँ
क्योंकि माँ नुमा ये जिल्द अपने पन्नों, को कभी बिखरते हुए नहीं देख सकती है ! क्योंकि माँ नुमा ये जिल्द अपने पन्नों, को कभी बिखरते हुए नहीं ...
प्यार देता है आज़ादी प्यार देता है …सिर्फ देता है …लेता नहीं …..। प्यार देता है आज़ादी प्यार देता है …सिर्फ देता है …लेता नहीं …..।
jag सुख दुःख दोनों संग चलें,फ़िर हँसना और क्या रोना है। jag सुख दुःख दोनों संग चलें,फ़िर हँसना और क्या रोना है।