Surendra kumar singh
Abstract
दिलचस्प और
रहस्यमय कहानी है जीवन
कभी लगता है
ये प्रकृति में है
प्रकृति में ही जीवन है
ये कहानी
मुद्दत से प्रवाहमान है
जीवन मे
जीवन काल की तरह।
तुम्हारा होना
एहसास
आज
चलो
सुबह है
चेहरे पर मुस्...
स्पर्श
मन का आकाश
तुम्हारी आगोश...
धोखा ही धोखा खाओगे अपना सर्वस्व गंवाओगे। धोखा ही धोखा खाओगे अपना सर्वस्व गंवाओगे।
पवन भी आकाश से मुक्ति पाते ही ,वसुधा से आ लिपटा है। पवन भी आकाश से मुक्ति पाते ही ,वसुधा से आ लिपटा है।
बस अपने ह्रदय का एंटेना चालू रखिये , जो रजिस्टर करता रहे सभी भावनाओं को ! बस अपने ह्रदय का एंटेना चालू रखिये , जो रजिस्टर करता रहे सभी भावनाओं को !
कभी शीशा ए दिल को यूँ सनम तोड़ा नहीं करते बुला कर बज़्म में अपनी कभी तन्हा नहीं करते। कभी शीशा ए दिल को यूँ सनम तोड़ा नहीं करते बुला कर बज़्म में अपनी कभी तन्हा नह...
हां हर घर कुछ कहता है अपनों से ही तो वह बनता है। हां हर घर कुछ कहता है अपनों से ही तो वह बनता है।
लड़की खुश है क्योंकि उसमें सपने उगने लगे हैं। मन के वृक्ष पर! लड़की खुश है क्योंकि उसमें सपने उगने लगे हैं। मन के वृक्ष पर!
मेरे इस साथी को ही भगाकर ले गई है। मेरे इस साथी को ही भगाकर ले गई है।
जहां ठंडी रेत ओढ़लें हम चांदनी में घोलकर। जहां ठंडी रेत ओढ़लें हम चांदनी में घोलकर।
कुछ गोलियाँ काँच वाली ख़ाली माचिसें बहुत ढेर सारी लट्टू और उसकी रस्सियाँ! कुछ गोलियाँ काँच वाली ख़ाली माचिसें बहुत ढेर सारी लट्टू और उसकी रस्सियाँ!
पलकों की कोरों की अभिव्यक्तियों में, सीप के मोतियों की तरह पलकों की कोरों की अभिव्यक्तियों में, सीप के मोतियों की तरह
ऐसे क्षण विस्मृत होकर भी हिय के कांटे बन जाते हैं! ऐसे क्षण विस्मृत होकर भी हिय के कांटे बन जाते हैं!
मेरी सत्यता से अनजान मेरे छद्मवेश को ही सब जाने सब जाने। मेरी सत्यता से अनजान मेरे छद्मवेश को ही सब जाने सब जाने।
मैं हर तरह महसूस करना चाहती हूं हर सांस तक। मैं हर तरह महसूस करना चाहती हूं हर सांस तक।
फूल, कली, तितली, भ्रमर, इन्द्रधनुषी रंग। कोयल, मोर,पपीहरा, गा बारिश के संग।। फूल, कली, तितली, भ्रमर, इन्द्रधनुषी रंग। कोयल, मोर,पपीहरा, गा बारिश के संग।।
यह तस्वीर बहुत कुछ हमें बताता है बंद मुट्ठी में कंकड़ का राज बताता है। यह तस्वीर बहुत कुछ हमें बताता है बंद मुट्ठी में कंकड़ का राज बताता है।
मजदूर तेरी मजदूरी का कर्ज एक दिन सबको चुकाना है। मजदूर तेरी मजदूरी का कर्ज एक दिन सबको चुकाना है।
कभी कभी तो अब लगता है मानो मैं ही खुद से जुदा हो चुका हूँ। कभी कभी तो अब लगता है मानो मैं ही खुद से जुदा हो चुका हूँ।
उस रेंगती नदिया के कदम देखना चाहती हूँ । उस रेंगती नदिया के कदम देखना चाहती हूँ ।
हज़ारों खुशियाँ दामन में समेटे घर की चौखट महकाती है ज़िंदगी। हज़ारों खुशियाँ दामन में समेटे घर की चौखट महकाती है ज़िंदगी।
न जाने कब यह मिल जाएं, अजब ही रूप है इन का पिता, माँ, बहन, बेटी, दोस्त या फिर शिक्षक न जाने कब यह मिल जाएं, अजब ही रूप है इन का पिता, माँ, बहन, बेटी, दोस्त या फि...