STORYMIRROR

Shabbar Raza

Romance

3  

Shabbar Raza

Romance

जीवन संगनी

जीवन संगनी

1 min
151

तुम मेरी ज़िंदगी की बहार हो

तुम ही मेरी ग़ज़ल

तुम ही मेरा प्यार हो

तुम ही मेरा संजीत

तुम ही जीवन का सार हो


तुम बिन अधूरी है ज़िंदगी

तुम ही मेरा माझी

तुम ही नदिया की धार हो


तुम ही सफलता 

तुम ही मेरा संसार हो

प्रेम की सच्ची मूरत हो तुम

तुम ही मेरी पहली तमन्ना 

तुम ही मेरा सच्चा यार हो


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance