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Jyoti Khari

Abstract Romance Tragedy

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Jyoti Khari

Abstract Romance Tragedy

जीवन के बुझे हुए चिराग़

जीवन के बुझे हुए चिराग़

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नादां उम्र में कर बैठे हम एक गलती…

कुछ इस कदर बुझे फिर खुशियों के चिराग़,

न ही मौत से रूबरू हुए न ही बची जीवन की हस्ती …

नादां उम्र में कर बैठे हम एक गलती।


ये जीवन की शाख उस मुसाहिब के बिना अधूरी है…

उल्फ़त है और रहेगी तुम्हीं से ,

ये जान लो तुम, तुम्हारा ये जानना ज़रूरी है।


हमेशा के लिए खो गयी लबों पर से तबस्सुम…

खुदा की इनायत होगी,

एक नज़र भर दिख जाओ अगर तुम।

अंतिम सांसों तक रहेगी पीड़ा- ए- फ़ुर्क़त…

दुआ करते हैं रब से,

दो दिलों में न हो कभी कोई अदावत।


ये प्रेम की हिकायत भी याद रखेंगे…

न भूलेंगे, न ही तुमसे कोई शिकवा करेंगे।

हम इतने ज़ार-ज़ार हैं…

संग फ़कत अश्कों के सैलाब हैं,

अभी तलक भी वो ही आफाक़ हैं, वो ही मशअल – ए- महताब हैं।


निस्बत में हमारे बेतहाशा मसाफत है …

उन्स है उनसे, लेकिन जीवन में वस्ल नहीं,

कुछ इस तरह की हमारी मोहब्बत है।

काग़ज भी शब्दों के भार से नम है…


हाथ छूट गए, यादें अभी भी कायम है,

ज़िंदगी का ये सबब है…

यादों के दरिया में बह रहे हैं हम,

ढाये कुछ इस कदर ज़िंदगी ने हम पर सितम हैं।

मुसाहिब- साथी

उल्फ़त- प्रेम

तब्बसुम- मुस्कान

इनायत- मेहरबानी

फ़ुर्क़त- विरह

अदावत- नफ़रत

हिकायत- कहानी

आफ़ाक़- दुनिया

मशअल – ए- महताब- उज्जवल चाँद

निस्बत- संबंध

मसाफत- दूरी

उन्स- लगाव

वस्ल- मिलन

– ज्योति खारी


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