Pritam Khaple
Inspirational Others
हवस ये जीत कि पा ली है ख़ुद में अब,
बहुत देख लिए ख़्वाब अकेले में
उन्हें मुकम्मल कर बेआबरू करना है अब।
Ishq
इक नज़्म लिखी...
जीत
जीवन
वजीर
इंक़लाब
आज आठ दशक और हो गया है नौवें में प्रवेश। आज आठ दशक और हो गया है नौवें में प्रवेश।
निजी ज़िन्दगी से लेकर सामाजिक ज़िन्दगी तक , हर नयी दिशा के साथ 'बवाल ' मचना जुड़ा है। निजी ज़िन्दगी से लेकर सामाजिक ज़िन्दगी तक , हर नयी दिशा के साथ 'बवाल ' मचना जुड़ा...
चन्दा सोहे शीश पर , काम नशावन हार । मोह निशा का नाश कर , ज्ञान दिवस दातार।। चन्दा सोहे शीश पर , काम नशावन हार । मोह निशा का नाश कर , ज्ञान दिवस दातार।।
मैंने विरासत में करोड़ो पाने वालो को, छिपने में सुकून महसूस करते देखा है| मैंने देखा है, मैंने विरासत में करोड़ो पाने वालो को, छिपने में सुकून महसूस करते देखा है| मैंने द...
हां मैं वहीं हिन्दुस्तान हूं, मैं हर एक फौजी की जान हूं। हां मैं वहीं हिन्दुस्तान हूं, मैं हर एक फौजी की जान हूं।
प्रथम प्रणाम उन मात-पिता को, जिन्होंने मुझको जन्म दिया। प्रथम प्रणाम उन मात-पिता को, जिन्होंने मुझको जन्म दिया।
अदम्य साहस धैर्य भुजबल, भारत माता के सपूत। अदम्य साहस धैर्य भुजबल, भारत माता के सपूत।
तुम फिर प्रयास करो यशवंती अपना भुजबल आजमाओ तुम। तुम फिर प्रयास करो यशवंती अपना भुजबल आजमाओ तुम।
पिंजरे की चिड़िया थी सोने के पिंजरे में। वन की चिड़िया थी वन में। पिंजरे की चिड़िया थी सोने के पिंजरे में। वन की चिड़िया थी वन में।
मैंने कहा- "तुम स्त्री जात हो इसीलिए भावनाओं की गंगा में बहती रहती हो मैंने कहा- "तुम स्त्री जात हो इसीलिए भावनाओं की गंगा में बहती रहती हो
तुझसे ही तो प्रेरणा पाता है समाज, ज़िंदा है ज़िन्दगी, हे मज़दूर महान। तुझसे ही तो प्रेरणा पाता है समाज, ज़िंदा है ज़िन्दगी, हे मज़दूर महान।
एक भाषा बोली, समझी जाए जरूरत थी आन पड़ी अंग्रेजों ने विदेशी शिक्षा का प्रसार बड़ा किया एक भाषा बोली, समझी जाए जरूरत थी आन पड़ी अंग्रेजों ने विदेशी शिक्षा का प्रसार ...
खुशी के हर पल बिखरे कभी लोरी, कभी आंख-मिचोली में खुशी के हर पल बिखरे कभी लोरी, कभी आंख-मिचोली में
हिन्दी भाषा में अथाह कोष के, सजीव दर्शन दे जाता है। हिन्दी भाषा में अथाह कोष के, सजीव दर्शन दे जाता है।
एक संभावनाओं की दुर्घटना अधिक लगता है, और मन में अनायास अवांछित होने का भाव जगता है एक संभावनाओं की दुर्घटना अधिक लगता है, और मन में अनायास अवांछित होने का भाव ज...
जीवन पथ पर चला पथिक ना जाने तू किधर चला। जीवन पथ पर चला पथिक ना जाने तू किधर चला।
“अपना हाथ जगन्नाथ”, बूझ लो तुम इस बात का सार। “अपना हाथ जगन्नाथ”, बूझ लो तुम इस बात का सार।
खेलते तो सभी हैं ताश, करते रहते हैं अपना मनोरंजन। खेलते तो सभी हैं ताश, करते रहते हैं अपना मनोरंजन।
हम मनोहर दूरवर्ती, कार्यक्रम चलाएं। अपने सभी बच्चों का,हम सब ग्रुप बनाएं। हम मनोहर दूरवर्ती, कार्यक्रम चलाएं। अपने सभी बच्चों का,हम सब ग्रुप बनाएं।
जी ठीक समझा आपने, वो मेरे पिता थे। जी ठीक समझा आपने, वो मेरे पिता थे।