Pritam Khaple
Inspirational Others
हवस ये जीत कि पा ली है ख़ुद में अब,
बहुत देख लिए ख़्वाब अकेले में
उन्हें मुकम्मल कर बेआबरू करना है अब।
Ishq
इक नज़्म लिखी...
जीत
जीवन
वजीर
इंक़लाब
आज भी मेरे बाबुल की गलियां बरकरार है, रिश्ते सच्चे हैं और सब में खूब सारा प्यार है। आज भी मेरे बाबुल की गलियां बरकरार है, रिश्ते सच्चे हैं और सब में खूब सारा प्य...
हम खज़ाना छोड़ दें, पर क्या ज़माना छोड़ दें! हम खज़ाना छोड़ दें, पर क्या ज़माना छोड़ दें!
नारी बिन जीवन नही, जाने यह संसार। यही सृष्टि का रूप है, यही जगत आधार।१। नारी बिन जीवन नही, जाने यह संसार। यही सृष्टि का रूप है, यही जगत आधार।१।
आसान कहां है किसी मजबूत महिला से प्रेम करना! आसान कहां है किसी मजबूत महिला से प्रेम करना!
जहाँ अंधेरे सा दिखता हर प्रकाश है, वहाँ आशा बड़ी निराश है। जहाँ अंधेरे सा दिखता हर प्रकाश है, वहाँ आशा बड़ी निराश है।
याचक बनने से अच्छा है दाता बनने की राह पर चलिए! याचक बनने से अच्छा है दाता बनने की राह पर चलिए!
अपनी ममता का आँचल, तूने मुझ पर वार दिया था। अपनी ममता का आँचल, तूने मुझ पर वार दिया था।
बस चले गए, कहीं तुम चले गए, छोड़ कर ये सूनी रातें , कुछ अधूरी अधूरी बातें ! बस चले गए, कहीं तुम चले गए, छोड़ कर ये सूनी रातें , कुछ अधूरी अधूरी बाते...
भोर का वो उगता सूरज देता है सबको इक आस, ऐसे ही तुम हो कुछ बहुत खास! भोर का वो उगता सूरज देता है सबको इक आस, ऐसे ही तुम हो कुछ बहुत खास!
हम करें नादानियाँ पर उसे जो हँस कर सहे, खुशियाँ सदा हम पर लुटाये मौन हो हर दुख सहे। हम करें नादानियाँ पर उसे जो हँस कर सहे, खुशियाँ सदा हम पर लुटाये मौन हो हर दु...
जो जो
कमर पर दुपट्टा बांधकर तुम्हारे घर की जिम्मेदारियां उठाते हुए, हां! मैं वही नारी हूं। कमर पर दुपट्टा बांधकर तुम्हारे घर की जिम्मेदारियां उठाते हुए, हां! मैं वही...
ह्रदय से तुम स्वागत कर पाओ, उस दिन तुम यह दिवस मनाना। ह्रदय से तुम स्वागत कर पाओ, उस दिन तुम यह दिवस मनाना।
उठ खड़ी हो बन द्रौपदी तू धनुष टनकार कर ! उठ खड़ी हो बन द्रौपदी तू धनुष टनकार कर !
चलो मिटा दे आज ये भेद नर और नारी का, होने दे विकास आज, नन्ही मुन्नी परियों का! चलो मिटा दे आज ये भेद नर और नारी का, होने दे विकास आज, नन्ही मुन्नी पर...
नमन...... नमन हे आद्या शक्ति नवल उन्नति के विहान पर । नमन...... नमन हे आद्या शक्ति नवल उन्नति के विहान पर ।
यह मुनासिब समय नही है किसी को अपनी तकलीफ़ बताने का ! यह मुनासिब समय नही है किसी को अपनी तकलीफ़ बताने का !
माँ के कोख से जन्म लेकर जब संसार में आता मानव। माँ के कोख से जन्म लेकर जब संसार में आता मानव।
हर सम्मान पा रही हूं ऊंचाइयों की हदों के पार भी अपना परचम लहरा रही हूं हर सम्मान पा रही हूं ऊंचाइयों की हदों के पार भी अपना परचम लहरा रही हूं
मैं हर बार गिरा और सम्भलता रहा, दौर खुदा की रहमतों का चलता रहा। मैं हर बार गिरा और सम्भलता रहा, दौर खुदा की रहमतों का चलता रहा।