STORYMIRROR

Pritam Khaple

Romance

4  

Pritam Khaple

Romance

इक नज़्म लिखी है

इक नज़्म लिखी है

1 min
353

इक नज़्म लिखी है

इन हवाओं के साथ भेज रहा हूं  

तेरे जवाब की उम्मीद नही है पर

तेरे पढ़ने की ख्वाइश है 

लेकिन इंतजार करता हूं मै


कुछ पल मिले थे आज खुद के लिए,

जिनमे खयाल तुम्हारा आया है।

हमारी यादें झांकती है उस टूटी सुराख से

जिन्हे अब मैंने हसीन पलों की अलमारी में बंद कर किया है।

तेरे खुशनुमा साथ की असीर थी ये खुशी,

खैर तेरे जाने से साथ नही है अब

पर तेरी यादों के झोंको में कभी कभी मुस्कुरा देता हूं मै।


मिलो चल सकता हूं मै,

पर तेरे शहर का ये सफर मंजिल नहीं दे सकता ये जानता हूं मै।

इस कहानी में मैने कुछ पन्ने खाली ही रखे है

ताकि ये किस्सा एक बार के लिए तो अंजाम तक पोहचाया जाए

मैं परेशान हो गया हूं इस कहानी को संवारते संवारते

बस एक अलविदा कहकर

इसे एक प्यारा सा पूर्णविराम देकर इसकी खूबसूरती बढ़ा देना चाहता हूं मै।


एक खत भेजा है हवाओं के साथ

जिसके जवाब का इंतजार करता हूं मै। 



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance