STORYMIRROR

Salil Saroj

Abstract

3  

Salil Saroj

Abstract

जीत लूँगा आसमाँ

जीत लूँगा आसमाँ

1 min
135

मैं जीत लूँगा

एक दिन

ये सारा का सारा आसमान

और उसपे लिख दूँगा

अपनी यातना की कहानी।


अपना रुदन और क्रंदन

ताकि तुम साफ-साफ सुन सको

और समझ सको कि

जो तुम कर रहे हो

वो सब ठीक नहीं है।


मेरी असमर्थता का मज़ाक

तुम्हारी मर्दानगी सा सटीक नहीं है

तुम्हे बदलना होगा अपना

ये रवैया, ये व्यवहार।


वर्ना मैं बादल बनके बरसूँगा

तुम्हारे ही बनाए

सभ्य समाज पे

जिसकी बूँदों से

मैं तुम्हारा अभिमान गलाऊँगा।


और फिर समता की 

एक नई फसल लहलहाऊँगा।।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract