जीत और हार जिंदगी के दो पहलू
जीत और हार जिंदगी के दो पहलू
यह जिंदगी है जनाब
हार और जीत यहां चलती ही रहती है।
जिसने हार को पचा लिया
अपने आप को संभाल लिया
उससे कुछ सबक लिया
उसके बाद उसको जीत हासिल हो ही जाती है।
क्योंकि उस जीत में उसकी
कड़ी मेहनत और अपनी कमियों को हटाकर खूबियां में बदलने की ताकत होती है।
और वह जीत ही जाता है
ऐसा हमने बहुत होते देखा है जिंदगी में उनको सफल होते देखा है।
कुछ उदाहरण तो हमारे घर में ही हमने देखे हैं।
दो नंबर के कारण पोजीशन पीछे होते देखी।
सही समय पर दो नंबर के तकलीफ को 100 नंबर में बदलते देखा, और मेरिट में आते देखा।
इससे बड़ा क्या उदाहरण होगा हमने भी जिंदगी में बहुत जगह
हार कर जीत हासिल की है।
कहते हैं ना हार के जीतने वाले को बाजीगर कहते हैं ।
वह सही ही लगता है ।
थोड़ा सबर थोड़ी हिम्मत थोड़ी मेहनत अपने ऊपर अटूट विश्वास और अपनों की हौसला अफजाई,
हारने वाले को भी जीता देती है।
जीतने वाले को भी अति विश्वास उसको हारने पर मजबूर कर देता है।
क्योंकि वह सोचता है मुझको कोई हरा ही नहीं सकता है, और वह हार जाता है।
और वह हार वह बर्दाश्त नहीं कर पाता है।
और कभी-कभी तो गहरी निराशा में डूब जाता है।
इसीलिए मैं कहती हूं हार और जीत जिंदगी के दो पहलू हैं जिंदगी में
हारना और जीतना लगा ही रहता है।
हार को पचाना सीखो उससे सबक लेकर आगे बढ़ो।
जीत पर इतराना मत सीखो।
उसको कायम रखने के लिए मेहनत करते चलो
और जीत को कायम रखो।
