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Dipesh Kumar

Abstract Classics Romance


4.7  

Dipesh Kumar

Abstract Classics Romance


जब चाँद को देखता हूँ

जब चाँद को देखता हूँ

1 min 435 1 min 435

अक्सर जब खुश होता हूँ 

बस चाँद को देखता हूँ

और जब दुखी होता हूँ 

बस चाँद को देखता हूँ !


जब भी देखता हूँ चाँद को 

खुश होकर एक हस मुख 

चेहरा नज़र आता हैं!


और जब दुखी मन से देखता 

तो  उदास चेहरा नज़र आता हैं

बस में यही सोचता हूँ अक्सर 

कही चाँद मैं आइना तो  नहीं


क्यों बन जाता हैं चेहरा 

मेरा मन होता हैं वैसा

यही सोचता हूँ अक्सर 

जब चाँद को देखता हूँ !


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