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Parth Gurav

Romance

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Parth Gurav

Romance

इंतकाम बरसात का

इंतकाम बरसात का

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आसमान से गिरती ये बारिश एक पैगाम लायी है, 

पैगाम मे मेरे लिए इंतकाम लायी है। 


ये गिरती बारिश खुशबू भी साथ लायी है, 

मेरा इंतकाम लेने मेरी मोहब्बत आयी है। 


बता दो मेरी मोहब्बत को मैं इंतकाम न हारूंगा, 

मेरे दिल का तौफा मैं उसपर न वारूंगा। 


बारिश की बंदे धरती में समा गयी, 

पेहली नज़र में ही वो हसीना मुझे भा गयी। 


क्या कहु जो रूप था उसका, 

क्या कहू उसकी आँखे, 

याद है मुझे अभी भी पेड़ के नीचे मुलाकाते। 


इंतकाम में वो मुझसे खफा हो गयी, 

मेरी मोहब्बत भी मुझसे बेवफा हो गयी,। 


याद है मुझे अभी वो व्कत जब मैं उसके साथ था और,

वो इंतकाम बरसात का। 


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