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Bhavini Singh

Romance

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Bhavini Singh

Romance

इनायत

इनायत

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बोलती तो रहती हूं,

बातें ख़तम नहीं होती,

तुझे देखती तो रहती हूं,

मुस्कान कम नहीं होती,


क्या कहूं क्या करूँ

ये ऐसी चीज़ है,

जो हर किसी को हज़म

नहीं होती।


क्या खूब नसीब है मेरा,

जो तू मुझे मिला है,

तू इबादत है ख़ुदा का

जो उसने मुझे दिया है।


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