Bhavini Singh
Drama
प्यार जो
हर किसी की
ज़िंदगी को एक
नया मोड़ देता है।
इनायत
धूप से रचेगा मंच धूप से रचेगा मंच
मत तड़पा अब मुझे ओ मेरी स्वप्न सुंदरी। मत तड़पा अब मुझे ओ मेरी स्वप्न सुंदरी।
जिसने सिर्फ सहना सीखा, आवाज़ उठाना भूल गया। जिसने सिर्फ सहना सीखा, आवाज़ उठाना भूल गया।
लेकिन मैं अब जान चुकी हूँ तुम्हारे लिए मैं किसी तकिये से कम नहीं हूँ.. लेकिन मैं अब जान चुकी हूँ तुम्हारे लिए मैं किसी तकिये से कम नहीं हूँ..
मौसम से मौसम मैं हमेशा तुमसे प्यार करता हूँ ! मौसम से मौसम मैं हमेशा तुमसे प्यार करता हूँ !
कभी उसे देखती हूँ चलते हुए दरख्तों के बीच से..... शायद हरियाली की आस में.... कभी उसे देखती हूँ चलते हुए दरख्तों के बीच से..... शायद हरियाली की आस में....
हाँ, मैं एक कठपुतली हूँ.... प्रारब्ध की जीती जागती कठपुतली। हाँ, मैं एक कठपुतली हूँ.... प्रारब्ध की जीती जागती कठपुतली।
सपनों की उड़ानों से आगे की जीने में अधिकारों से आगे की। सपनों की उड़ानों से आगे की जीने में अधिकारों से आगे की।
उनके दिल में अगर चिराग़ जला पाऊँ तो भी बहुत है! उनके दिल में अगर चिराग़ जला पाऊँ तो भी बहुत है!
पर उम्मीद पूरी रखती हूं काश ये दुनिया मुझे समझ पाती। पर उम्मीद पूरी रखती हूं काश ये दुनिया मुझे समझ पाती।
इंसान है इंसान रहने की कोशिश में है बेटा दिन में नौकर रात को शौहर ही गया। इंसान है इंसान रहने की कोशिश में है बेटा दिन में नौकर रात को शौहर ही गया।
सुना है ऐसे कलियुग के मतवाले 'असुर' मुझको कहते हैं । सुना है ऐसे कलियुग के मतवाले 'असुर' मुझको कहते हैं ।
देखते रहना किसी पर्वत के उतंग शिखर से किंकर्तव्यविमूढ़। देखते रहना किसी पर्वत के उतंग शिखर से किंकर्तव्यविमूढ़।
तुम न सोचना झूठा हूँ मैं, देशवासियों के लिए, फ़ना हो रही है, ये तुम्हारे दिल की धड़कन... यहीं कहता ह... तुम न सोचना झूठा हूँ मैं, देशवासियों के लिए, फ़ना हो रही है, ये तुम्हारे दिल की ...
तुम में दम है तुम कुछ भी कर सकती हो तुम में दम है तुम कुछ भी कर सकती हो
फिर कौन कहता है कि माँ समझतीं नहीं ? वो माँ हैं जनाब वो सब समझती हैं। फिर कौन कहता है कि माँ समझतीं नहीं ? वो माँ हैं जनाब वो सब समझती हैं।
जिस जगह तुमने रखा था कदम बाग़ फूलों भरा अब वहाँ हो गया जिस जगह तुमने रखा था कदम बाग़ फूलों भरा अब वहाँ हो गया
और तेरा प्यार भी मेरे संग जायेगा इन लकीरों की तरह। और तेरा प्यार भी मेरे संग जायेगा इन लकीरों की तरह।
तेज से मैं बन ज्वाला हर तेरे बंधन दग्ध करुँगी। तेज से मैं बन ज्वाला हर तेरे बंधन दग्ध करुँगी।
कहने को तो दो घर है पर बेटियों का कोई घर नहीं होता ! कोई घर नहीं होता ! कहने को तो दो घर है पर बेटियों का कोई घर नहीं होता ! कोई घर नहीं होता !