STORYMIRROR

निर्मला कूमारी

Romance

4  

निर्मला कूमारी

Romance

हवा

हवा

1 min
4

हवा हू हवा मै 
बसंती हवा हू 
जहाँ से चली मै 
बही खो गई हू 
हवा हू हवा मै 
नदी रेट नीरजर 
नई खेत पोखर 
हिलती चली मै 
झूलाते चली मै 
हवा हू हवा मै 
बसंती हवा हू 
इधर से चली मै 
उधर को खो गई मै 
कभी आम जकोड़ा 
कभी महुआ झकोड़ा 
गिरती चली मै 
थप थपाते चली मै 
हवा हू हवा मै बसंती हवा हू 
कभी सरसो हिलाया 
कभी गेहूं को झुकाया 
फिर भी ना रुकी मै 
न थकी मै हवा हू हवा मै 
बसंती हवा हू 


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

More hindi poem from निर्मला कूमारी

हवा

हवा

1 min पढ़ें

Similar hindi poem from Romance