हवा और बूंदों का मिलन
हवा और बूंदों का मिलन
हवा बोली बूंदों से
मैं तुझसे मिलने आई हूं
तेरी इन नन्हीं नन्हीं बूंदों
के कोमल स्पर्श से
फिजा में लहराने आई हूं
पहाड़ों नदियों वादियों में
मैं मुस्कुरा कर लहराने आई हूं
हवा बोली बूंदों से
मैं पत्थर से पहाड़ों से टकराती हुई
मैं तुझसे मिलने आई हूं
बहुत महीनों से मैं धूप में
तपकर लू बनी
पर अब वक्त आया
बारिश की बूंदों से मिलने का
अब एक ठंडी हवा बन कर आई हूं
मैं तुझसे खुशी-खुशी मिलने आई हूं।
