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Simran Fatima

Others

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Simran Fatima

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सोचती हूं मैं जब

सोचती हूं मैं जब

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सोचती हूं मैं जब एक उम्मीद लेकर

एक ख्वाहिश एक सपना लेकर

बंद आंखों से नहीं,

खुली आंखों से देखती हूं सपना

जिसमें होता है साकार अपना सपना

इसमें होता है कामयाबी का एहसास अपना

यह एहसास होता है सपना।



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