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Jyoti Gupta

Abstract

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Jyoti Gupta

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होस्टल लाइफ

होस्टल लाइफ

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हम गए उस दिन तो जाना

हाल है ऐसा होस्टल का


होस्टल है एक कैदखाना

जो है पाबंंदिओ का खजाना


ये ना करो वो करो

अपना कोई न मन का कारो


एक पल सोच के दंग मैं रह गया

कैसे इन पाबंदियों को लगाउंगा लगे


होस्टल के उन नियमो के साथ

कैसे फिर हम जी पायेेंगे


थे हम आजाद पंछिया

ऐसे नही थी हममे पाबंदिया


ये हाल उस दिन का था बस

गए थे बस आवेदन को जब।


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