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Jyoti Gupta

Abstract

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Jyoti Gupta

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मेरी माँ

मेरी माँ

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हर धूप में तू छाँव है माँ

मेंरी आखरी  उम्मीद है माँ


जब तू कुछ कहती है

एक आसरा मुझे मिलता हैमाँ


जब दूर तुझसे मैंं होता

महसुस अधूरा सा होता है माँ


कहीं अगर मैं कुछ करने जाता

तेरा सूनापन मुझे सताता है माँ


तेरी दुआ से मुझे मिली ज़िन्दगी

तेरी अमानत मैं हूँ मेरी माँँ।


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