STORYMIRROR

Jyoti Gupta

Abstract

4  

Jyoti Gupta

Abstract

मेरी माँ

मेरी माँ

1 min
225

हर धूप में तू छाँव है माँ

मेंरी आखरी  उम्मीद है माँ


जब तू कुछ कहती है

एक आसरा मुझे मिलता हैमाँ


जब दूर तुझसे मैंं होता

महसुस अधूरा सा होता है माँ


कहीं अगर मैं कुछ करने जाता

तेरा सूनापन मुझे सताता है माँ


तेरी दुआ से मुझे मिली ज़िन्दगी

तेरी अमानत मैं हूँ मेरी माँँ।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract