STORYMIRROR

Dr.Pratik Prabhakar

Abstract

4  

Dr.Pratik Prabhakar

Abstract

होली खुशियों की

होली खुशियों की

1 min
220


कहीं आतिशबाजी होती

कहीं ख़ुशियों की होली

जाते-आते हँसते-गाते 

हो जाती है हँसी ठिठोली।।


रक्त है कहीं पर उबलता,

कहीं साथ का रुत बदलता

कहीं मादक मुस्कान है फैली

कहीं तमन्ना दिल की भोली।।

हो जाती है हँसी ठिठोली।


यह मंजर याद आएगा जरूर

यादों में मोहतरमा, हुजूर

कैसे कैसे दिन- रैन बीतते

कितनों ने कितने राज खोलीं

हो जाती है हँसी ठिठोली।।


ऐसे ही रहे दमकते चेहरे

चाहे वक्त हो कितने गहरे।

हमेशा सभी तारों से चमके

पूरे करे कसमें जो भी ली।।

होती ही रहे हँसी ठिठोली।।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract