STORYMIRROR

हमे अपना फ़र्ज़ निभाना है|

हमे अपना फ़र्ज़ निभाना है|

1 min
807


पंचतत्व से शरीर बनाकर

जीवात्मा हममे भरते हैं

वो हमारे भाग्य विधाता हैं

ईश्वर हम जिनको कहते हैं

हैं कर्जदार हम ईश्वर के

हमे अपना कर्ज चुकाना हैं

मानवता की रक्षा करके

हमे अपना फ़र्ज़ निभाना है


हैं कर्जदार हम पौधों के

जो श्वांसवायु से ज़िंदगी देते हैं

हमे अपना कर्ज चुकाना हैं

इनके जीवन की रक्षा करके

हमे अपना फ़र्ज़ निभाना है


हैं कर्जदार माँ-बाप के हम

जिन्होंने हमको दिया जनम

हमे अपना कर्ज चुकाना हैं

तन-मन-धन से उनकी सेवा करके

हमे अपना फ़र्ज़ निभाना है


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract