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Prashant Beybaar

Abstract

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Prashant Beybaar

Abstract

हम सब जो यूँ बढ़ रहे हैं

हम सब जो यूँ बढ़ रहे हैं

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हम सब जो यूँ बढ़ रहे हैं

एक नए वक़्त में चल रहे हैं

आगे बढ़ने में माहिर हैं

कि हम सब एक मुसाफ़िर हैं।



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