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V. Aaradhyaa

Inspirational

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V. Aaradhyaa

Inspirational

हम अब कहाँ जाएँ

हम अब कहाँ जाएँ

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जैसे-तैसे टक्कर, ठोकर खाकर दफ्तर हम पहुँच ही जाएँ, 

देख व्यवस्था का हाल मन से निकले बस हाय!!


सड़क में गढ्ढे या गढ्ढों में सड़क समझ न कोई पाए,

और चेष्टा सिस्टम की रुकती ही कभी न हाय!!

 

चले कार्य निर्माण का पूरे साल पसीना बहाएँ,

सिस्टम के रखवाले देश को चूना कैसे लगाएँ!!


गढ्ढों में हम खेलें व किनारे सौन्दर्यीकरण पाएँ, 

देख व्यवस्था का हाल मन से निकले बस हाय!!


देश के नौज़वानों के लालों की अतुलित निष्ठा हाय,

बेईमानी का कोई मौका हाथ से छूट न जाय!!


भ्रष्टाचार की गंगा में सब मिल के डुबकी लगाएँ

बड़ी या छोटी मछली मिलजुल सब कोष पचाएँ!!


और परिणामों की गणना में शून्य खड़ा इठलाए,

बरसों से है यही दशा-ऐसे ही चलता जाय!!


देख व्यवस्था का हाल मन से निकले बस हाय।

ऐसी उबड़ खाबड़ व्यवस्था को छोड़कर भला हम कहां जाएं


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