हे राम
हे राम
हे राम नहीं है अब यहां तुम्हारा काम
यहां तो चाहिए बस मुफ्त में तमाम
गुलामी में रहे हैं अब तक वही पसंद है
बहन बेटियों की आबरू लुटवाना पसंद है
आतंकवादियों के बम बारूद अच्छे लगते हैं
सुबह शाम नमाज के शब्द हमको सच्चे लगते हैं
56 टुकड़ों में लाश सूटकेस की शोभा पाती है
हमें तो जाली टोपी ही मोर मुकुट नजर आती है
भ्रष्टाचार में जीने की अब तो आदत सी हो गई है
ईमानदारी न जाने कहां जाकर तान खूंटी सो गई है
धूर्त मक्कार नेताओं को पूजने लगें हैं हम लोग
सनातन को मिटाने में जी जान से लगे हैं हम लोग
अब तुम यहां रहकर क्या करोगे , मेरी बात मानो
हम रावण के पुजारी हो गये हैं , जल्द ही ये भेद जानो
हमें इस देश में अब तुम्हारी कोई दरकार नहीं है
जो तुम्हें काल्पनिक बताये वही सरकार सही है
श्री हरि
