STORYMIRROR

डिजेन्द्र कुर्रे कोहिनूर

Abstract

2  

डिजेन्द्र कुर्रे कोहिनूर

Abstract

हाथी

हाथी

1 min
441

हाथी मेरा साथी तुम्हें ढूंढ़ रहे थे,

कहां गए थे बता दो यार।

जंगल में नहीं मिल रहे थे,

कहां गए थे बता दो यार।

बड़ी मुश्किल से पाया,

जान में जान आया।

देख के तुझे मै गले लगाया,

गले लगाकर तुझे सहलाया।

छोड़के मुझे अब नहीं जाना,

इसी जगह में जीवन बिताना।

हाथी मेरा साथी कुछ बोल दो यार,

प्रेम की भाषा कुछ तौल दो यार।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract