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Phool Singh

Inspirational

4  

Phool Singh

Inspirational

हाँ मैं जल हूँ

हाँ मैं जल हूँ

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कद्र न जाने, मोल न जाने

बात टके आज कहूँ

अल्प, विस्तृत दोनों हूँ, पर

जीवन की खातिर सीमित हूँ।।


अथाह सागर में मैं व्यापक

नहर, नदी, झील में सीमित हूँ

पर्वत, मैदानों में धार में बहता

हर जीव का प्राण भी हूँ।।


जड़, जींवत, प्रलय का कारण

आदि, अनादि सार्थक हूँ

कभी अविष्कृत कभी तिरस्कृत

मैं जीवन का सार भी हूँ।।


हाँ मै जल, पानी व जीवन 

आज वक्त की माँग भी हूँ

बर्बाद करों न ऐसे-तैसे 

मै, अहम जीवन का हिस्सा हूँ।।


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