गोपन हृदय
गोपन हृदय
गोपन हृदय में पलती एक फरियाद है,
तेरी खुशियां ही मेरी दुनिया की इबादत और जज़्बात हैं।
मौसम बदलते हैं, पर मेरी मोहब्बत का रंग नहीं बदला,
अंबर केसरिया हो उठे जब तुम्हारा गुजरा हमारे सामने से हो।
लोग कहते हैं हमें बदनाम मोहब्बत ने किया,
पर सच तो ये है, तेरे बिना हर सांस अधूरा सा जीया।
समाज की नज़रों में चाहे दोषी हो जाएँ,
पर तेरे बिना हम अधूरे हो जाएँ।
तेरे बिना जैसे मौसम बिन बहार का,
तेरे बिना जैसे चाँदनी बिन चांद की।
हृदय की बातों में भी तेरी तस्वीर ही आती है,
तेरे इम्तिहान में मेरा इश्क़ हर रोज़ खड़ा हो जाता है।
प्रेम की परिभाषा तेरा नाम लेकर पूरी होती है,
मोहब्बत तेरे बिना जैसे अधूरी कोई रागिनी रोती है।
ओ सजन, बस सुन ले मेरी खामोश गुजारिश को,
तेरे बिना ये जीवन सूना है, तेरे संग ही है इसकी सौगात को।
:- मैं आपका अपना हेमंत चौधरी अगर आप मेरी कविता पसंद आई हो तो इसी लाइक करें और ऐसे अल्फाज आगे पढ़ने के लिए मुझे follow करें।

