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Sumit. Malhotra

Abstract Action Classics

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Sumit. Malhotra

Abstract Action Classics

गली के दो किनारे

गली के दो किनारे

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सुनिए गली के दो किनारे है हम, 

उस तरफ़ तुम इस तरफ़ है हम। 


हमारे बीच में बहती जाती सदा, 

रीति रिवाजों प्रथाओं की धारा। 


आमने सामने हम दोनों रहते हैं, 

प्यार दोनों बेपनाह करते हम है। 


दिल तो हमारे एक दूजे के पास, 

पर तन हमारे दूर-दूर ना है पास। 


गली के दोनों किनारे मिलते नहीं, 

लैला मजनू कलयुग में मिले नहीं। 


हौंसला बढ़ाते हम-तुम को जाना, 

प्यार क़िस्मत में तो एक हो जाना। 


कब दोनों गली के किनारे एक हो, 

प्यार की दास्तान जल्द से पूरी हो। 


काटना ये सफ़र हमारा इस सहारे, 

कभी तो एक होगे गली के किनारे।


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