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अनामिका वैश्य आईना Anamika Vaish Aina

Abstract

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अनामिका वैश्य आईना Anamika Vaish Aina

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गीत - मौसम*

गीत - मौसम*

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घड़ी-घड़ी बदले मौसम जाने कैसी आग लगाये

ताप मे तर कर दे कभी बारिश में प्यास जगाये..


कभी दहकता अग्नि जैसा

कभी सुकून सावन सा

कभी सर्दियों की कम्पनी

कभी जुनून पावन सा

कभी बहारो कभी वसंतो से हमे खूब सजाये..


तेज तपन सूरज की फैले

कभी चन्द्र हो शीतलता

कभी बारिशों का सावन तर

कभी पड़ती अकालता

मौसम बदले वक़्त सा सुख-दुःख मे साथ निभायें..


मौसम समाज के जैसा ही

है पूरा ही तो पागल

विपरीत समय का अक्सर

बनता काला बादल 

अफ़वाहों सी चलें हवाएँ कभी तो छू करके महकाये..


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