Sudhirkumarpannalal Pratibha
Abstract Inspirational Thriller
घाव
हरा
रहता
है
तबतक
जबतक
उसपर
प्रेम
का
मरहम
नहीं
लगता
लगते हीं
सूख
जाता है
और
एक
समय
ऐसा
आता है
अस्तित्वहीन
हो
जाता है।
बेटी
रिश्तों का कम...
प्रेम सर्वव्य...
प्रेम निशब्द
सही मायने में...
हाँ मैं ही तो देती उन्हें ज़िन्दगी। हाँ मैं ही तो देती उन्हें ज़िन्दगी।
कुछ लाज़मी सा ही सही मुझे जीने को कोई वजह दे दे। कुछ लाज़मी सा ही सही मुझे जीने को कोई वजह दे दे।
मेरा जल तो तुम्हारा ही है इसे रखना तुम स्वच्छ पवित्र। मेरा जल तो तुम्हारा ही है इसे रखना तुम स्वच्छ पवित्र।
कहीं कलकल बहती जाती हूं मैं नदी हूं मैं सब की प्यास बुझाती हूं। कहीं कलकल बहती जाती हूं मैं नदी हूं मैं सब की प्यास बुझाती हूं।
छोड़ धरती वापस जाऊंगी, सूना रह जाएगा यह संसार। छोड़ धरती वापस जाऊंगी, सूना रह जाएगा यह संसार।
कहने को तो शिव के शीश में समाई है। कहने को तो शिव के शीश में समाई है।
कवियत्री को न पसंद आने वाले जज़्बातों की एक अनोखी तालिका कवियत्री को न पसंद आने वाले जज़्बातों की एक अनोखी तालिका
संस्कृति को समृद्ध जीवनयापन को सुखद। संस्कृति को समृद्ध जीवनयापन को सुखद।
जब तक है बच्चा, सरकार करेगी उसकी सुरक्षा। जब तक है बच्चा, सरकार करेगी उसकी सुरक्षा।
सागर तीरे ईश कृति निहारे दृश्य हैं प्यारेl सागर तीरे ईश कृति निहारे दृश्य हैं प्यारेl
हकीकत को देख एक दिन दहल जाएँगे। हकीकत को देख एक दिन दहल जाएँगे।
हरियाली की वहाँ चादर बिछा ले बाग तू धरा का फिर से सजा दे। हरियाली की वहाँ चादर बिछा ले बाग तू धरा का फिर से सजा दे।
ख़ुशी उमंगों को लाकर बाँहों में अपने भर लो ! ख़ुशी उमंगों को लाकर बाँहों में अपने भर लो !
ये हैं भविष्य भारत कुल का यही वृक्ष विशाल बन जाएंगे। ये हैं भविष्य भारत कुल का यही वृक्ष विशाल बन जाएंगे।
बात समझने की है यारों बचपन ऐसा ही होता है। बात समझने की है यारों बचपन ऐसा ही होता है।
तुम चलायमान, मैं ठहरा निर्वाह कर सको तो आओ। तुम चलायमान, मैं ठहरा निर्वाह कर सको तो आओ।
मुझे स्वच्छ नदी ही रहने दो यही बस मेरा श्रेय है। मुझे स्वच्छ नदी ही रहने दो यही बस मेरा श्रेय है।
मैं नदी, पहाड़ों से निकलती हूँ, जमीन पर कल कल बहती हूँ। मैं नदी, पहाड़ों से निकलती हूँ, जमीन पर कल कल बहती हूँ।
क्योंकि ज़िन्दगी है एक जादू खुद ही में, नहीं है ये कोई चीज़ आम। क्योंकि ज़िन्दगी है एक जादू खुद ही में, नहीं है ये कोई चीज़ आम।
निरंतर आगे बढ़ती अपने वेग से, ना रूकी, ना झुकी, ना थमी मैं, निरंतर आगे बढ़ती अपने वेग से, ना रूकी, ना झुकी, ना थमी मैं,