STORYMIRROR

Sukanta Nayak

Abstract

3  

Sukanta Nayak

Abstract

एक प्यारा सा रिश्ता

एक प्यारा सा रिश्ता

1 min
406

कितना प्यारा है ये रिश्ता

ना कोई पाने की चाह ना कोई गिला सिकवा

प्यार और ममता की अनूठा मिसाल

सबसे अलग ईश्वर की बनाई अनमोल रिस्ता।


ईश्वर कण कण में बैठे हैं 

फिर भी दिखाई नहीं पड़ते

आंखें खुली रह जाती हैं

फिर भी सामने भगवान होते हुए

दिखाई नहीं पड़ते।


हर चीज़ की अहमियत पता चलती है

जब खुद की जान पे बन आती है

अपनों की याद तभी सताती है

जब झूठ मुखोटे पहने लोगों से धोका मिलता है।


अपने भी बेगाने हो जाते हैं

बस एक साथ रह जाती है

माँ का आँचल धूप में छाँव बन जाता है।


रब ने हम में प्राण भरे हैं 

और जरिया माँ को बनाया

इसलिए वो रूप है रब का

चाहे इंसान हो या हो कोई जानवर।


हो कितना भी साँप

या हो जहरीला

माँ होती अपने बच्चों के लिए

एक अनमोल रतन रब का।


अक्सर गलती होती इंसानों से

भूल जाते है माँ की ममता

लेकिन इतनी तो अकल होती है जानवरों में 

अपने पराये की समझ और माँ की ममता।


कर्ज चुका तो नही पाएंगे उस रब की

माँ की थोड़ी सी सेवा करदेना

जीवन में चाहे कुछ कर पाओ या नहीं

ममता का थोड़ा मान ही रख लेना।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract