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Anand Shekhawat

Inspirational


4.0  

Anand Shekhawat

Inspirational


एक मजबूत किसान

एक मजबूत किसान

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उठा मस्तक बादलों की तरफ, करता अर्जी एक किसान। कुछ दो या न दो,पर दे दो, बस बारिश रूपी वरदान।

सूर्योदय में निकलता हूँ घर से,लिये हाथ मे हल और बैलों की जोड़ी। मेहनत में न है कोई कमी बस,मौसम और कालाबाज़ारी ने कमर है तोड़ी।

सोचो तो मैं सबके लिए अन्न उगाता हूँ,उसी चक्र में जीता और मरता हूँ। लोगों को भले न हो फिक्र मेरी,लेकिन फिर भी मैं लाख कोशिशें करता हूँ।

धोती- अंगौछे में निकला पूरा जीवन,न मुझे कोई पेंट- कमीज की आस है। दो रोटी लाता मैं, दो कांदे संग,झेवन होता यही हमेशा, एक केतली छाछ है।

चिंता सताती हर -पल, साहूकारी ब्याज की,फसल खराब हो जाए भले ही गेहूं और प्याज़ की। खरीददार कोई न मिलता,खाद्यान सड़ता जाता है,आखिर कम कीमत में, सारा बेचना पड़ जाता है।

बच्चें पल -पल मन मसोसकर रह जाते है। लेकिन फिर मुझसे कुछ न कह पाते है। जीवन को सुंदर बनाने की कोशिश में, जीवन सारा बीत गया। मैं जीतूं या न जीतूं, भाग्य मेरा जीत गया।


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