STORYMIRROR

Priya Choudhary

Abstract Inspirational

3  

Priya Choudhary

Abstract Inspirational

ऐ काल बता तू हँसता तो होगा

ऐ काल बता तू हँसता तो होगा

1 min
172

धमनी को पकड़ कर बैठा है 

सांसों पे शिकंजा कसता है तो होगा  

ऐ काल बता तू हँसता तो होगा 


आया होगा मेरी बस्ती में 

 तू भयानक रूप धार करके

मैंने तेरा रूप स्वीकार किया 

संग खेला मीत तेरा बनकर के 

एक जन्म के बाद में मुझे मिला 

खोया अपना तू रास्ता तो होगा 

ऐ काल बता तू हँसता तो होगा 


दुनिया में दौलत वन है 

पर घमंड नजर ना आता है 

और एक ना एक दिन आ 

तू सबको गले लगाता है 

साधु सा चलता जाता है 

औघड़ तू कहीं पर बसता तो होगा 

ऐ अकाल बता तू हँसता तो होगा


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract