एक अँगूठी !
एक अँगूठी !
दिखती छोटी आकर गोल
रखती कई रिश्तों का मोल
क़ीमत उसकी कुछ भी लगा लो
चाहो हर चीज़ का मोल तुम पा लो
वो मोल है एक बन्धन का
कई रिश्तों के संबंधन का
जोड़ के रखता कितनों को
हर सुख-दुःख में अपनों को
दो अनजानों की गवाही बनता
रिश्तों की परवाहि बनता
जोड़ के एक बन्धन में
हर्षोंल्लास अभिनंदन में
सोना-चाँदी, हीरे-मोती
सब कुछ ख़ुद में पिरोए होती
हर ऊँगली की क़िस्मत होती
जब उसकी पहनाई होती
ऊँगलियों का श्रृंगार बनती
ख़ुद पे कभी न गुमान करती
दो रिश्तों का अभिमान बनती
ख़ुशियों का वरदान बनती।
