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ritesh deo

Abstract

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ritesh deo

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एहसास

एहसास

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महसूस हुआ कुछ तुमको भी,

या मुझको ही एहसास हुआ।

हर ओर नजर बस आए तुम,

मन भीगा हृदय उदास हुआ।


घिर घिर कर आई घटा घोर,

मन उड़ा गगन में बिना डोर।

जब छुआ पवन ने हौले से,

तन डोल गया कुछ खास हुआ।


डबडबा उठे तब गगन नयन,

झर उठे अश्रु फिर धरा अंगन।

नीरदमाला बरबस चमकी,

स्मृतियों का सैलाब हुआ।


जीवन अनकही कहानी है,

रुत आनी है रुत जानी है।

थक गया विहग अब बाट जोह,

कब मीत मिले बेहाल हुआ? 


जब गया कहाँ कुछ कह पाया,

बस आस रही वो कब आया? 

चिर रही प्रतीक्षा स्वप्न रहा,

नम आँखें हृदय मलाल रहा।


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