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Deepika Raj Solanki

Abstract

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Deepika Raj Solanki

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ए दिल मेरे

ए दिल मेरे

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दिल! मेरे यू ना हो हैरान-परेशान, 

नहीं अकेले हो तुम इस जहां में,

मेरी सांसे है साथ तेरे हर प्रभा में

छोड़ा है तुमको किसी ने जो इस पथरीली राह में,

वह अज्ञानी इश्क - ए- एहसास ना जाने,

रब की इबादत इसमें, मंदिर की घंटी का रस इसमें,

अकेला फिर कहां दिल तू मेरा, एहसासों से लबालब है दिल मेरा तू।।

   


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