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anuradha nazeer

Abstract

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anuradha nazeer

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दूर हो जाएगा

दूर हो जाएगा

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 नारी तु मेरा देवता हो

नारी को पूजा करते हैं। 

नदी को नारी का नाम से पुकारते हो

भारत माता को भी नारी कहते हैं।


मां, बहन और पत्नी आदि  

कितना रूप धारण करती है ? 

सिर्फ अपना परिवार की नारी को गौरव देते हैं 

मगर हमेशा कोशिश क्यों न करते हैं ? 


 सभी नारी की सम्मान करने के लिए

 नारी की सिर्फ पूजा करने से क्या फायदा है ?

 मन में करो पूजा नारी का। 

वाहनों का जरूरत नहीं पड़ती।


एक भिखारी भी मां बोल कर पुकार ते है। 

मां मुझे भूख लगी है कुछ खाने के लिए दे दो। 

इतना औरतों को नाम प्यार का, 

फिर भी इज्जत क्यों लूटते हो ?


नारी का अपहरण क्यों करते हो 

नारी को क्यों नाराज़ कर ते हो

नारी को क्यों नरम कहते हैं

नारी भी तो बला है। 


नारी अबला बिल्कुल नहीं है 

नारी तो सिर्फ नारी है

कभी भूल मत कर

 कभी दुर्गा बनती है।


तब दुर्गा बनती है मानलो

तुम्हारा विनाश हो जाएगा। 

अगर बुरा होतो !

सावधान रहो नारी से। 


नहीं तो हो गया तेरे नाश

नारी का इज़्ज़त मत लूटो

नारी को देवता मानलो मन ही मन

तब दूर होगा तुम्हारी पाप सब।


नमन करो

नमस्ते करो

पूजा पाठ करो

दुख दूर हो जाएगा !


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